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अमेरिका में खुफिया विभाग की चीफ तुलसी गबार्ड ने दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति ट्रंप को बताया पद छोड़ने की वजह

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : May 22, 2026 11:02 pm IST,  Updated : May 22, 2026 11:42 pm IST

तुलसी गबार्ड ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सरकार के नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर के पद से इस्तीफ़ा दे दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें पद छोड़ना पड़ रहा है क्योंकि उनके पति कैंसर से जूझ रहे हैं।

अमेरिकी खुफिया विभाग की चीफ तुलसी गबार्ड- India TV Hindi
अमेरिकी खुफिया विभाग की चीफ तुलसी गबार्ड। फाइल Image Source : AP

वाशिंगटनः अमेरिकी खुफिया विभाग की चीफ तुलसी गबार्ड ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पति की दुर्लभ बीमारी का हवाला देकर नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर का पद छोड़ दिया है। अपने इस्तीफे में तुलसी गबार्ड ने बताया कि पति की हड्डी के कैंसर से लड़ाई में उनका साथ देने के लिए नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर के पद से इस्तीफ़ा दे रही हैं। गबार्ड ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस में हुई एक मीटिंग के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप को इस बारे में बताया।

30 जून होगा कार्यकाल का आखिरी दिन

जानकारी के अनुसार, तुलसी गबार्ड के कामकाज का आखिरी दिन 30 जून होगा। अपने इस्तीफे में गबार्ड ने कहा कि आप पर मेरे भरोसे और पिछले डेढ़ साल से नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर के ऑफिस को लीड करने के मौके के लिए वह दिल से शुक्रगुज़ार हैं। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान इस्तीफ़ा देने वाली वह चौथी कैबिनेट अधिकारी हैं।

तुलसी के बाद एरॉन लुकास संभालेंगे जिम्मेदारी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उनके इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि दुर्भाग्य से तुलसी गबार्ड 30 जून को प्रशासन छोड़ देंगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने आगे कहा कि गबार्ड के जाने के बाद नेशनल इंटेलिजेंस के प्रिंसिपल डिप्टी डायरेक्टर एरॉन लुकास, नेशनल इंटेलिजेंस के एक्टिंग डायरेक्टर के तौर पर काम करेंगे।

ट्रंप के साथ मतभेद की अटकलें

इससे पहले कहा जा रहा था कि ईरान पर हमला करने के राष्ट्रपति ट्रंप के फ़ैसले के बाद तुलसी गबार्ड सरकार से अलग हो जाएंगी। इस फ़ैसले से उनके प्रशासन के भीतर कुछ मतभेद पैदा हो गए थे। गबार्ड ने सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी को दिए गए लिखित बयान में कहा कि पिछले साल अमेरिकी हमलों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह तबाह हो जाने के बाद ईरान ने अपनी परमाणु क्षमता को फिर से बनाने का कोई प्रयास नहीं किया था। यह बयान ट्रंप के बयान के विपरीत था, जिन्होंने बार-बार ज़ोर देकर कहा था कि ईरान से खतरे को टालने के लिए यह युद्ध ज़रूरी था।

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